Monthly archives: जुलै, 2026

संपूर्ण अंक/ मराठी / हिंदी

कलयुग की दहलीज, अज्ञान का रास्ता

बचपन से ही पढ़ने-सुनने में आता है – “अमुक विषय पर विद्वानों में मतभेद है।” बारंबार कही हुई बात सच लगने लगती है। ऐसा आभास होता है कि विद्वानों का काम अपने और दूसरों के ‘मत’ में ‘भेद’ करना ही होता है! 

फिर जब उम्र चुनाव में भाग लेने लायक हो जाती है, तब पता चलता है कि मत में भेद करना ही पर्याप्त नहीं! पाँचेक साल में जिम्मेदार नागरिक को अपने ‘मत’ का ‘दान’ करना होता है। और अगर अपने काम के लिए किसी तरह का शोध करना हो, तो कुछ ऐसा सिखाया जाता है – “अपना मत (‘ओपिनियन’) नहीं दो!

पुढे वाचा