पार्श्वभूमि
- तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के ३० से अधिक साल पूरे हो गए हैं. साल १९९२ में संविधान में संशोधन के साथ इस पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई थी.
- ७३वें संशोधन की वजह से आदिवासी क्षेत्रों (अनुसूचित क्षेत्रों) में पंचायती राज के विस्तार और वन अधिकारों के लिए कानून बने.
- अपनी टिप्पणी में सी आर बिजॉय लिखते हैं कि लोकतंत्र को बिना मजबूत किये सत्ता के विकेन्द्रीकरण की ३० वर्षों से अधिक की यह कहानी आशा से निराशा की तरफ जाती है.